- Get link
- X
- Other Apps
- Get link
- X
- Other Apps
Men's Day पर विशेष:
पहले तो
घावों की रेखाएँ
मर्दों के मान समझी जाती थीं,
सीने की हर चोट
उनकी शौर्य–कथा गाती थीं।
अब
Men’s Day पर
उपहार की थैली लेकर इतरा रहे हैं लोग—
मानो
सुगंधित साबुन–तेल से ही
मर्दानगी का रह गया हो संयोग।
कभी
रणभूमि में चमकता था
मर्दों का धैर्य और बल,
आज
फीते बाँधकर मिलने वाले
उपहारों पर ही है हलचल।
सोचने पर तो कोई मर्द ही मजबूर होगा,
'घावों से लेकर गिफ्ट तक',
कितनी जंग लगी है मर्दानगी की परिभाषा!
- Get link
- X
- Other Apps
Comments
Post a Comment